सुर्ख़ जोड़े में सजा कर एक दुलहन भेज दी
ज़िंदगी से खेलने को फूलों वाली सेज दी उसकी सारी गुड्डियाँ,सारे पटोले छीन कर उसकी दुनियाँ से ख़ुशी की सारी कलियाँ बीन कर सिर्फ़ तोहफ़े में दिए हैं,चन्द आँसू ,ज़ब्त,आहें, कै़दख़ाने की तरह दीं जिस्म से लिपटी निगाहें कितने किरदारों में जाने,उम्र भर अब नाचना है, अपने हिस्से के सभी क़िस्सों को ख़ुद ही जाँचना है.... एक लम्बी उम्र का अब दायरा करना है तय, अपना सब कुछ भूल कर,दूजों के गम को बांटना है, #उर्मिलामाधव.. 27.7.2015 पटोले---- गुड्डे... |
दास्तां कह रही हैं
हवाएं अजब दास्तां कह रही हैं, कहाँ से चली हैं, कहाँ बह रही हैं
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