आली जनाब मरहूम कलाम साहब के नाम-----
---------------------------------------- एक दिन जाना सभी को है मगर, तेरा जाना किस क़दर है पुर असर!! शख्सियत के चाँद तारे,तुझमें थे, दर्द कितने दे गया तू बे-ख़बर, हर कोई खुद को ही फन्ने खां कहे, तूने बिन बोले दिया,बरपा क़हर वो जो तेरी मुस्कराहट आम थी, क़त्ल सब होते थे जिससे बिन तबर, रात भर का सोग,सुबहा भी यूँ ही, सूने-सूने हो गए,शम्स-ओ-क़मर, पर यूँ ही दुनियां चलेगी बिन रुके, तू न होगा,गम रहेगा .....उम्र भर, क्या सलामी दें,.....शहंशाहे वतन, सांस दे दें,.....लौट जो आये अगर... #उर्मिलामाधव.... 29.7.2015.... |
दास्तां कह रही हैं
हवाएं अजब दास्तां कह रही हैं, कहाँ से चली हैं, कहाँ बह रही हैं
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