वक़्त कितना ख़राब कर डाला, ख़ुद को ख़ुद ही हबाब कर डाला, तंज़ करना भी एक नशा ही है, सबको नाहक़ जवाब कर डाला, आग कितनी जिगर में रखते थे, जाने क्या-क्या हिसाब कर डाला, ज़िन्दगी उनकी तल्ख़ है शायद, हर मरासिम सराब कर डाला, गलतियां हमसे ये हुईं साहब, ज़ीस्त को जब सबाब कर डाला, जो न हरगिज़ ये ताब रखते थे, उनको भी जी जनाब कर डाला.. # उर्मिलामाधव ... 31.7.2015
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Showing posts from July, 2015
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ग़ज़ल... तू मुहब्बत में कभी रोया नहीं, तूने शायद आईना देखा नहीं, वक़्त के चेहरे की देखीं झुर्रियां, क्या दरूँ था ये कभी सोचा नहीं, उम्र भर तडपे ये तनहा ज़िन्दगी, तूने शायद ऐसा कुछ खोया नहीं.... दास्तां कहता है आधी रात की, पूछ उससे जो कभी सोया नहीं, आँख से टपका लहू,चस्पां रहा, दाग़ फिर दिल का कभी धोया नहीं.. # उर्मिलामाधव ... 30.7.2015...
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ग़ज़ल---- बख्श देगा हमको ये बाज़ार क्या?? हम बचा पायेंगे अब दस्तार क्या ?? बोलियाँ इज्ज़त की यूँ लगने लगीं, साफ़ ज़ाहिर था के हैं आसार क्या ?? सोच कर हालात हम घबरा गए , हार जाएगा अबस किरदार क्या ?? लोग सब आ-आके ये पूछा किये, ज़िंदगी से डर गए हो यार क्या ?? मौत की तारीकियां कहने लगीं, वाक़ई तुम होगये बेज़ार क्या ?? # उर्मिलामाधव ... 24.7.2014...
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दिल में कोई बात है और तुम नहीं, आओ देखो रात है और तुम नहीं, दूर मंदिर में .....ये बजती घंटियां, दिल में होतीं हैं अजब सरगोशियाँ, दिल धड़कता है न जाने किसलिए, याद आती हैं ....तुम्हारी शोखियां, दर्द की इफरात है और तुम नही, आओ देखो रात है और तुम नहीं, तीरगी सी छा गई घर भर में अब, लो मैं सोने आ गई बिस्तर में अब, हर कोई सो जायेगा जब नींद में, सो नहीं पाउंगी हरगिज़ पर मैं अब, तारों की बारात है ओर तुम नहीं आओ देखो रात है और तुम नहीं, वो तुम्हारा मुस्कुराना ......होठ से, सर झुकाके देखना ..एक ओट से, दिल तुम्हारा किस क़दर मासूम है, टूट जाना ....एक ज़रा सी चोट से, प्यार की सौगात है ओर तुम नहीं, आओ देखो रात है ओर तुम नहीं, जुल्म करते हैं ये अब हालात भी, दूर हो और कर न पाऊँ बात भी, दिल डराती हैं उफ़क़ पे बिजलियाँ, उस पै तन्हाई .......अँधेरी रात भी बे-अदब बरसात है और तुम नहीं, आओ देखो रात है और तुम नहीं.. #उर्मिलामाधव... 25.7.2015
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सुर्ख़ जोड़े में सजा कर एक दुलहन भेज दी ज़िंदगी से खेलने को फूलों वाली सेज दी उसकी सारी गुड्डियाँ,सारे पटोले छीन कर उसकी दुनियाँ से ख़ुशी की सारी कलियाँ बीन कर सिर्फ़ तोहफ़े में दिए हैं,चन्द आँसू ,ज़ब्त,आहें, कै़दख़ाने की तरह दीं जिस्म से लिपटी निगाहें कितने किरदारों में जाने,उम्र भर अब नाचना है, अपने हिस्से के सभी क़िस्सों को ख़ुद ही जाँचना है.... एक लम्बी उम्र का अब दायरा करना है तय, अपना सब कुछ भूल कर,दूजों के गम को बांटना है, # उर्मिलामाधव .. 27.7.2015 पटोले---- गुड्डे...
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Urmila Madhav updated her status. 3:48pm खुद ही खुद में दिल बहलाना अच्छा है, कभी-कभी का चुप रह जाना अच्छा है, हद से ज़्यादः बात गुज़रना ठीक नहीं, कभी-कभी तूफ़ान उठाना अच्छा है, बहुत शराफ़त,इल्ज़ामों की वाइस है, कभी-कभी अहसान जताना अच्छा है, खुली रहें आँखें और चौकन्ने खूब, कभी-कभीकुछ राज़ छुपाना अच्छा है, आसमान में उड़ना अच्छी बात सही, कभी-कभीकोई ख़ास ठिकाना अच्छा है, जिस्म सजाया जाता देखो रोज़ बहुत, कभी-कभी इक लहद सजाना अच्छा है, मुश्किल सच यारी की ग़र पहचान हमें, कभी-कभी दुश्मन बन जाना अच्छा है... # उर्मिलामाधव 28.7.2015
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आली जनाब मरहूम कलाम साहब के नाम----- ---------------------------------------- - एक दिन जाना सभी को है मगर, तेरा जाना किस क़दर है पुर असर!! शख्सियत के चाँद तारे,तुझमें थे, दर्द कितने दे गया तू बे-ख़बर, हर कोई खुद को ही फन्ने खां कहे, तूने बिन बोले दिया,बरपा क़हर वो जो तेरी मुस्कराहट आम थी, क़त्ल सब होते थे जिससे बिन तबर, रात भर का सोग,सुबहा भी यूँ ही, सूने-सूने हो गए,शम्स-ओ-क़मर, पर यूँ ही दुनियां चलेगी बिन रुके, तू न होगा,गम रहेगा .....उम्र भर, क्या सलामी दें,.....शहंशाहे वतन, सांस दे दें,.....लौट जो आये अगर... # उर्मिलामाधव .... 29.7.2015....