तुम बहुत मग़रूर हो तो मैं ग़मों से चूर हूँ...
इस क़दर मशहूर हो तो मैं बहुत मजबूर हूँ,
जा-ब-जा नज़रें घुमाना,हर जगह मिल जाउंगी,
शह्र के तुम नूर हो तो मैं वफ़ा की हूर हूँ,
ज़ीस्त की फेहरिस्त में हैं जाने कितने वाक़यात,
मुख़्तसर ये है के लम्बे वक़्त से रंजूर हूँ,
इस क़दर मशहूर हो तो मैं बहुत मजबूर हूँ,
जा-ब-जा नज़रें घुमाना,हर जगह मिल जाउंगी,
शह्र के तुम नूर हो तो मैं वफ़ा की हूर हूँ,
ज़ीस्त की फेहरिस्त में हैं जाने कितने वाक़यात,
मुख़्तसर ये है के लम्बे वक़्त से रंजूर हूँ,
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