मुश्किल से घबराना हमने नईं सीखा,
बेबस हो,मुरझाना हमने नईं सीखा, 

अपनी क़श्ती पार भंवर से कर लेंगे,
लहरों से डर जाना हमने नईं सीखा, 

साज़िश की बदबू तो हमको आती है,
लानत घर भिजवाना हमने नईं सीखा,

अपनी खातिर खूब ख़िलाफ़त देखी है,
डर कर पीठ घुमाना हमने नईं सीखा,

दरवाज़ों पर इस्तक़बाल लिखा है जी,
मजमा रोज़ लगाना हमने नईं सीखा...
उर्मिला माधव...7.6.2014...

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