आग में आग भड़का रहा दोस्तों,
काम पानी का फिर क्या रहा दोस्तो??
आग,रूहानी हो,आग जिस्मानी हो,
ज़ीस्त ही तो जली बारहा दोस्तो,
ज़िन्दगी भर जले,मर के भी जल गए,
खेल क़ुदरत का ये क्या रहा दोस्तो??
आशिक़ी में जले,जल गए वस्ल में,
आदमी क्या सिला पा रहा दोस्तो??
रौशनी के लिए शम्मा रौशन करे,
सिर्फ़ धोखा ही तो खा रहा दोस्तो....
उर्मिला माधव...
काम पानी का फिर क्या रहा दोस्तो??
आग,रूहानी हो,आग जिस्मानी हो,
ज़ीस्त ही तो जली बारहा दोस्तो,
ज़िन्दगी भर जले,मर के भी जल गए,
खेल क़ुदरत का ये क्या रहा दोस्तो??
आशिक़ी में जले,जल गए वस्ल में,
आदमी क्या सिला पा रहा दोस्तो??
रौशनी के लिए शम्मा रौशन करे,
सिर्फ़ धोखा ही तो खा रहा दोस्तो....
उर्मिला माधव...
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