मछली आ गई तालाब में

एक मछली आगई तालाब में,
गंदगी फैला गई कुल आब में,

एक मछेरे की  गज़ब जादूगरी 
जाने उसको क्या दिखाया ख़ाब में,

फंस गई तो कट गई ये मानलो,
आ गई कुछ इस तरह से ताब में,

अब रक़ाबी में सजाई जायेगी,
बाँट दी जाएगी हर अहबाब में,

बेखबर थी यूँ भी होगा एक दिन,
ज़िन्दगी बह जायेगी सैलाब में,
उर्मिला माधव..
30.6.2014...

Comments