दुनियां में किसी शै से मुहब्बत नहीं रही
दुनिया में किसी शै से मुहब्बत नहीं रही,
हमको किसीके प्यार की आदत नहीं रही,
आगे क़दम तो पीछे अदावत के जाल हैं,
दिल से मिलें किसीसे भीे,चाहत नहीं रही,
दिल के बहुत क़रीब थे जब वो बदल गए,
मजबूरियां थी,दिल को अक़ीदत नहीं रही,
फ़ेहरिस्त दोस्तों की.....,नहीं याद अब हमें,
हाँ अब किसी भी नाम से उल्फ़त नहीं रही,
वो वक़्त कोई और था जब प्यार में थे हम
वो जोश वो जुनूं ......वो इबादत नहीं रही
बातें मज़ाहिया सी,ज़रा हंस के चुटकियाँ,
लब-ए लवाब है .......के वो रंगत नहीं रही...
उर्मिला माधव..
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