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Showing posts from October, 2022

सितम हो रहा है

मेरे दिल पै कबसे सितम हो रहा है, के अब सब्र मेरा भी कम हो रहा है, लो आँखें बरसने-बरसने को आयीं, ये दिल भी अजब है कि नम हो रहा है, ये जी चाहता है कि मैं ख़ुद पै हंस लूँ, खुदा से भी बढ़के सनम हो रहा है, बहुत झुक गया है मेरा सर ज़मीं पर, कि घर मेरा दैर-ओ-हरम हो रहा है, तो साँसों का रुकना भी है तय शुदा ही  लो अब एड़ियों में ही दम हो रहा है.... #उर्मिलामाधव... 20.11.2014....

ख़याल आया हुआ

जा नहीं सकता कभी शीशे में बाल आया हुआ, दिल भुला देगा कभी उनका ख़याल आया हुआ जाने किस-किस शक्ल से उठती रही हैं उँगलियाँ, जैसे मेरी सादगी पर ....हो सवाल आया हुआ, ग़म शनासी की तलब करती नहीं बेचैन अब, देख लीजे ज़िन्दगी में है कमाल आया हुआ, कुछ लकीरों में रहेंगी ख़ामियां तकदीर की, आसमां देखेगा बस दिल पर मलाल आया हुआ उर्मिला माधव

खुल गए

इत्तिफाकन ज़िन्दगी के राज़ हम पर खुल गए, जो भी थे, जैसे भी थे ग़म बेश-कम, पर खुल गए,

हृदय विदीर्ण हो

जब ह्रदय विदीर्ण हो, स्वप्न जीर्ण-शीर्ण हो, मार्ग भी संकीर्ण हो, हारना नहीं पथिक, उठ खड़े हो वेग से, जो करो,त्वरित करो, अंधकार के समक्ष दीप प्रज्वलित करो... उर्मिला माधव...

हट गए

धीरे-धीरे हम जहां से हट गए, ज़िन्दगी के इम्तिहां से हट गए, जब हमें दरकार थीं तन्हाईयाँ, बस हर इक तीरो कमां से हट गए, जब सज़ा के वास्ते तैयार थे, जान के अम्न ओ अमां से हट गए, दुश्मनों के क़ाफ़िलों को देख कर, ख़ुद ही हम अपने मकां से हट गए, जब कभी दुनियां लगी बदरंग सी, हम हर इक सुंदर समां से हट गए, उर्मिला माधव