रिश्ता जता रहा है कोई
बड़े अदब से मुझे ये बता रहा है कोई, अभी न जाओ अभी मिलने आ रहा है कोई, मुझे सुपुर्द-ए- ज़मीं, देर से किया जाए, के वक़्ती तौर का रिश्ता जता रहा है कोई, अजब चलन है ज़माने का इक ज़माने से, मरे हुए की लहद क्यूँ सजा रहा है कोई, मुझे ख़बर है मिरा और क्या-क्या होना है, के जिस्म-ओ-जान का किस्सा मिटा रहा है कोई, इसी जहान में मुझसे है कोई वाबस्ता, लो मेरी मौत का क़र्ज़ा चुका रहा है कोई, मैं अब तो ख़ाक हूँ नज़रों में इस ज़माने की, अजब जुनून है के अब भी आ रहा है कोई.. उर्मिला माधव