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Showing posts from February, 2022

रिश्ता जता रहा है कोई

बड़े अदब से मुझे ये बता रहा है कोई, अभी न जाओ अभी मिलने आ रहा है कोई, मुझे सुपुर्द-ए- ज़मीं, देर से किया जाए, के वक़्ती तौर का रिश्ता जता रहा है कोई, अजब चलन है ज़माने का इक ज़माने से, मरे हुए की लहद क्यूँ सजा रहा है कोई, मुझे ख़बर है मिरा और क्या-क्या होना है, के जिस्म-ओ-जान का किस्सा मिटा रहा है कोई, इसी जहान में मुझसे है कोई वाबस्ता, लो मेरी मौत का क़र्ज़ा चुका रहा है कोई, मैं अब तो ख़ाक हूँ नज़रों में इस ज़माने की, अजब जुनून है के अब भी आ रहा है कोई.. उर्मिला माधव

भीग के घर जाते हैं

हम जो बारिश में कभी भीग के घर जाते हैं, यक़ता आँखों की चमक देख के डर जाते हैं, आईना देखें नहीं,इतनी क़सम दी खुद को,  लाख़ बचते हैं मगर फिर भी उधर जाते हैं,  हमने लोगों से कभी कोई भी शिकवा न किया, अपनी आहट से मगर, लोग बिखर जाते हैं, हमको अंदाज़ ख़बर इसका कभी हो न सका, किसकी चाहत के कहीं ख़्वाब से मर जाते हैं, ग़म की रफ़्तार तो ठहरेगी नहीं, ज़ाहिर है, चलते-चलते ही कहीं, हम ही ठहर जाते हैं.... #उर्मिला माधव.... 22.2.2015...

किया करते हैं हम

तनहाई में बात किया करते हैं हम, बस यादों के साथ जिया करते हैं हम, इतनी भीड़ जमा रहती है किस्सों की, इनको ही दिन रात दिया करते हैं हम, यहां किसीकी कोई ज़रूरत है ही कब, प्यार सनम का याद किया करते हैं हम, सहरा में भी दरया का अहसास रहे, अश्कों की बरसात पिया करते हैं हम, महफ़िल की शिरक़त भी भारी लगती है, ख़ल्वत को ख़िदमात दिया करते हैं हम, उर्मिला माधव 20.2.2020

कम नहीं

दुश्मनी का दायरा कुछ कम नहीं, फ़र्क़ बस इतना है, मुझको ग़म नही, ज़र्क़ दिल पर चाहे जितना हो मगर, इसपे भी ....गर्दन में कोई ख़म नहीं... उर्मिला माधव Dushmani ka dayra kuchh kam nahin, Farq bas itna hai mujhko ghum nahin, Zark dil par chaahe jitna ho magar Iss pe bhi gardan me koii khum nahin. Urmila Madhav

राबितों के उसने जो मानी

राबितों के उसने जो मानी हमें समझा दिए, दिल के टुकड़े करके हमने क़ब्र में दफ़ना दिए, नाख़ुदा उसको कहा ऑ हो गए हम ख़ुद हक़ीर, हमने अपनी सोहबत के हौसले दिखला दिए, क्या कमी थी बंदगी में ये बता बंदानवाज़, तूने जो इलज़ाम के तोहफ़े हमें पकड़ा दिए तंग इतनी हो गई झोली तेरी परवर दिगार, हैफ़,इज़्ज़त के जनाज़े पाँव से ठुकरा दिए, तेरी चौखट पर झुके है,इसके ये मानी नहीं, गम के शोले जिसने चाहा ज़ीस्त में भड़का दिए, हम न बदलेंगे कभी ये अपना शाहाना मिज़ाज सुन सरे महफ़िल इरादे हमने।भी बतला दिए... उर्मिला माधव..
इक हादसा ए बद से बहुत डगमगाए हम, कुछ ठीक भी हुए तो कभी चल न पाए हम,

ग़म नहीं

Dushmani ka daayra kuchh kam nahin, Farq bas itna hai , mujhko ghm nahin, **** दुश्मनी का दायरा कुछ कम नहीं, फ़र्क़ बस इतना है, मुझको ग़म नही, Zarq dil par chahe jitna ho magar, Ispe bhii gardan men koi kham nahin, **** ज़र्क़ दिल पर चाहे जितना हो मगर, इसपे भी ....गर्दन में कोई ख़म नहीं... Urmila Madhav.. 12.2.2017

खिराज़ ए अक़ीदत

निदा फ़ाज़ली जी को खिराज़-ए-अक़ीदत :: यही बात दिल को बतानी है यारो, बहुत बे-वफ़ा ज़िंदगानी है यारो, ये सांसों की रफ़्तार का आना-जाना, फ़क़त वक़्त की खींचातानी है यारो, हों हालात कुछ भी नहीं फ़र्क़  इससे, के लहज़ा-ब-लहज़ा निभानी है यारो, मुहब्बत से हो रु-ब-रु सब ज़माना, यूँ ही लम्हा - लम्हा बितानी है यारो, जिसे हम समझते हैं जागीर अपनी, यहीं सब पड़ी छोड़ जानी है यारो, हों ख़ामोश आहें या,पुर सोज़ आंखें न ग़ैरों को हरगिज़ दिखानी हैं यारो, अगर बंद हो जाएँ,मिज़्गाँ -ए-इंसां, तो शम भर में बीती कहानी है यारो... समझता है जिसको मुक़म्मल ज़माना, वो बस चार दिन की जवानी है यारो... उर्मिला माधव 8.2.2016

दूर का रिश्ता

दूर का रिश्ता बहुत नज़दीक था, जब तलक था दूर बिलकुल ठीक था, :: Door ka rishta ,bahut nazdiikiyon tha, Jab talak tha door,bilkul thiik tha कुछ निभाने में कमी होगी ज़रूर, मामला रिश्तों का बस बारीक था, :: Kuchh nibhaane men kami,hogi zaruur, Maamla rishton ka,bas bareek tha, यूँ कि ख़ुद मुख़्तार थीं नस्लें नई, ये नतीजा किस्सा ए तसदीक था, :: Yun ke khud mukhtar thin naslen, naii, Ye natija,qissa-e-tasdeek tha, ग़ालिबन बातों की वो रस्साकशी, हर इरादा मुद्दा ए तज़हीक था, :: Ghaliban baaton ki wo rassakashi, Har irada,mudda-e-tahziik tha, मुंह घुमाया और घर को चल दिए, हर क़दम अपना भी एक तहरीक था.... :: Munh ghumaya or ghar ko chal diye, Har qadam apnaa bhi ek tahreek tha... #उर्मिला 3.2.2015 तस्दीक---- सत्यपन.. तज़हीक----हंसी उड़ाना तहरीक-----आंदोलन...