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Showing posts from May, 2021

धुन में गाता होगा

वो जो कुछ अपनी ही धुन में गाता होगा, बातें उसकी कोई  समझ नहीं पाता होगा, हर कोई बस कुछ अनुमान लगाता होगा, कोई उसके मन तक पहुँच न पाता होगा, नदी किनारे बैठ प्रतीक्षा करते-करते, मन ही मन कुछ यादें भी दोहराता होगा, सागर की गहराई से भी गहरा-गहरा, ह्रदय पीर से उसका तब भर जाता होगा,  वो जोगी है,गीत प्रेम के गाता होगा, शब्दों में कितना इतिहास बताता होगा, बातें उसकी कोई समझ न पाता होगा, बातें उसकी कोई समझ न पाता होगा.... उर्मिला माधव... 30.5.2014...

बुलंदियों को सज़ा

कब से बुलंदियों को सज़ा दे रही हूं मैं, दिल को ग़लत जगह का पता दे रही हूँ मैं, सेहरा से रेत लेके,बनाया है पैराहन, तूफां को बिजलियों को सदा दे रही हूं मैं, दरकार ही नहीं है मुझे कोई  ग़म गुसार, अब ख़ुद ही रहगुज़र को दगा दे रही हूँ मैं, चलती रही हूं कब से अबस रंज ओ गम के साथ, अफ़सुर्दगी में ग़म को हवा दे रही हूं मैं, ऐ ज़िन्दगी मैं तेरे तईं, सोचती हूँ अब, किस बदगुमां को अपनी वफ़ा दे रही हूं मैं, उर्मिला माधव.. 20.5.2017

लाहौर वाले

याद तुमको कर रही हूँ, अय मियां लाहौर वाले, आज तक भी सब खड़े हैं, दरमियां लाहौर वाले, तुमने लानत भेज दी जब ज़िन्दग़ी को हार कर, अब भला किस काम की ये अदवियां लाहौर वाले, अब न तुम ही हो न कोई भी महकती शाम है, खोल दें या बंद रख्खें, खिड़कियां लाहौर वाले उर्मिला माधव

आलम है

बस यही ज़िन्दगी का आलम है, जब भी देखो तो आँख पुरनम है, यूँ तो वो दिल में अब भी रहते हैं, फ़र्क़ इतना है,जुस्तजू कम है, या हैं अनजान रस्म-ए-उल्फत से, या नहीं दिल में कोई दम ख़म है, हाँ मुहब्बत है हमने कह तो।दिया, दिल में काबा है,आब-ए-जमजम है, उनके हिम्मत जिगर में है ही नहीं, फिर तो वो कुछ नही,यही गम है... #उर्मिलामाधव... 8.5.2015