सताते हो
बस यूँ ही.....
खुद ही तो सताते हो,
फिर रूठ भी जाते हो,
पर्दा भी नहीं करते,
न ही सामने आते हो,
उस्लूब भी उल्फ़त का,
खुद ही न निभाते हो,
ज़ाहिर ही नहीं करते ,
हर बात छुपाते हो,
जैसे भी मसाइल हैं,
लोगों को बताते हो,
तनहाई भी मिलती है,
चौपाल में आते हो ....
उर्मिला माधव...
10.11.2014....
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