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Showing posts from January, 2024

क्यों नहीं रहती

मुझको परवाह क्यों नहीं रहती ? लब पे कोई आह क्यों नहीं रहती? कोई इज़हार-ए-इश्क़ करता रहे, दिल में कोई राह क्यों नहीं रहती ? भाते रहते हैं कितने चेहरे मगर, कोई भी चाह क्यों नहीं रहती? अपनी मर्ज़ी से ख़्वाब बुनती हूँ, हस्ब-ए-इस्लाह क्यों नहीं रहती? हुस्न-ए-मंज़र से भी मुतास्सिर हूँ, ज़ेहन में वाह क्यों नहीं रहती ? सबको है फ़िक्र दीन-ओ-दुनियां की, मुझको लिल्लाह क्यों नहीं रहती? उर्मिला माधव, 6.11.2016

रख रही हूँ

ग़ज़ल ------ मैं किताबें अब सरहाने रख रही हूं, चंद वरकों में ज़माने रख रही हूं, हर वरक संजीदगी के नाम है, एक माज़ी सोलह आने रख रही हूं, इक तजुर्बों का पुलिंदा,हर नफ़स, ज़िन्दगी के ताने-बाने रख रही हूँ, कुछ अंधेरे और दिए बुझने की राख़ और धुंए के कुछ ख़ज़ाने रख रही हूँ, गोकि एहसास-ए-घुटन हलका न हो, बंद करके,कुछ दहाने रख रही हूं,  जिस की दम पे दिन गिने हैं उम्र भर, अपनी तस्वीही के दाने रख रही हूँ, एक खनक आहों के हिस्से की भी है, सबके अपने-अपने ख़ाने रख रही हूं, उर्मिला माधव, 28.10.2017

मुग़ालते हैं

कोइ साथ चल सकेगा,वो भी मुग़ालते हैं यादों के सिलसिले हैं,वो भी खंगालते हैं, सूखे शजर के पत्ते,गिरते हैं ख़ुद ब ख़ुद ही, दिल जो धड़क रहा है,वो भी संभालते हैं , उर्मिला माधव

प्यार लिख दूँ

दिल तो शर्माता है फिर भी,तुम कहो तो प्यार लिख दूँ, और तुम्हारे दिल के आगे,अपने दिल की हार लिख दूँ ? प्यार के इन दायरों में बंध के रहना ....है तो मुश्किल, पर किसी दीवार के कोने में इक इज़हार लिख दूँ दिल ये कहता है,तुम्हीं मख़सूस हो मेरे लिए , सोचती हूँ दिल ही दिल में,तुमको मैं दिलदार लिख दूँ.... ज़िन्दगी तो हर क़दम दुश्वारियों का नाम है  बस इन्ही दुश्वारियों में,इश्क़ का किरदार लिख दूँ उर्मिला माधव

कभी मेरी गली आना

बहुत देखा जहां जाना ,कभी मेरी गली आना, दर-ओ-दीवार गलियों के,बहुत सीलन भरे होंगे, और हाँ वो तीरगी के साए में, डरकर छुपे होंगे, जो बर्ग-ए-गुल मुख़ातिब हो,तो आंसू देखना उसके, बदन में आबले होंगे ,महज़ ग़म पूछना उसके, ये मेरी ज़िंदगी जो अब तलक पुर ख़ार ज़िन्दां है, मेरे ग़म से मेरे रब की भी दुनियां,ख़ास वीरां है, चमन वीरां,सहन वीरां,लगे रूह-ओ-ज़ेहन वीरां, बहे आँखों से जो दरिया लगे गंग-ओ-जमन वीरां, यहाँ आब-ओ-हवा शम्स-ओ-क़मर को दूर रखती है, मसर्रत के जहां में ख़ास कर माज़ूर रखती है , के ज़ेरे आसमां लो रात भर तुम भी गुज़ारो तो, बड़ी शिद्दत से हिम्मत से सितारों को पुकारो तो, अगर आवाज़ ख़ाली लौट कर आये तो बतलाना, हुआ महसूस कैसा इस तरह,बेकार चिल्लाना, कभी मेरी गली आना..... #उर्मिलामाधव... 9.1.2016

चाहते हैं

आप सब मशहूर होना चाहते हैं, यानि सब से दूर  होना चाहते हैं। यानि ग़म से चूर होना चाहते हैं, हम कि जो घबरा चुके हैं भीड़ से, हर किसी से दूर होना चाहते हैं..