Posts

Showing posts from July, 2022

न तू देख इतने गुरूर से

न तू देख इतने ग़ुरूर से, कि मैं लौट जाऊंगी दूर से, ये पयाम तेरी नज़र को है, इसे जोड़ दिल के सुरूर से, मेरे ग़म से तू भी है, पुरअसर, मेरा दावा है मैं ग़लत नही, न तू ऐतक़ाफ़ से काम ले, आ बचा ले ख़ुद को क़ुसूर से, तू ही मेरे दिल का करार है, तुझे सोचती हूँ मैं रात दिन, मेरी शाम है तेरी जुस्तजू, है सहर भी तेरे ही नूर से, मेरे दिल का कौन हफ़ीज़ है, तेरी दूरियां ही ज़वाल हैं, ये बता कि किससे गिला करें, जो मिले हैं दर्द ग़ुरूर से, ये बयान देना पड़ा मुझे, तेरी जुस्तजू के सवाल पर, कभी ज़िन्दगी में विसाल हो, तो कहूंगी पूरे शऊर से.. उर्मिला माधव

हे सदाशिव

हे सदाशिव आपका आभार है, शून्य ही तो सृष्टि का आधार है. कितनी सारी शक्तियां ब्रह्माण्ड की, कुछ निरापद है तो ये संसार है, ह्रास चारित्रिक हुआ मानव का अब, हर किसी मस्तिष्क में व्यभिचार है, जो करोगे,लौट कर मिल जाएगा, अवतरित है और ये साकार है, दिग्भ्रमित होना तो निश्चित है यहाँ, इस तरह संसार का आकार है.... उर्मिला माधव...

तन्हा सफ़र किया है

तन्हा सफ़र किया है बड़ी कसरतों के साथ, ख़ुद को शजर किया है बड़ी हिम्मतों के साथ, मुश्किल बहुत थी ज़िन्दगी, और राह भी न थी, ग़म ने असर किया है बड़ी फुरसतों के साथ... कुछ दोस्तों को शुक्र अदा यूं भी कर दिया, हमको ख़बर किया है बड़ी शिद्दतों के साथ.. बर्बादियों का जश्न मना कर भी ख़ुश रहे, सब दर गुज़र किया है बड़ी निस्बतों के साथ.. सदियों से अपने ग़म में यूं ही मुब्तिला रहे, ग़म ही नज़र किया है, नई क़ुरबतों के साथ.. उर्मिला माधव

हसीन देखा

पहले से ख़्वाब हमने ज़्यादा हसीन देखा, जब धड़कनों को अपनी ताज़ा तरीन देखा, मुश्किल हुआ समझना,क्या ज़ेहन में लिखा है, जब शख्सियत को इतना ज़्यादः ज़हीन देखा, बारीकियां समझना,आसान तो नहीं था, जिस्म-ओ- जिगर पे होता चर्चा महीन देखा, कुछ अहमियत न देखी जज़्बात की जहां में, हर लम्हा ज़िन्दगी को ,ऐसी मशीन देखा, हैरत में हर कोई था ये देख कर यक़ायक, मेहताब को ज़मी पर, परदा नशीन देखा, उर्मिला माधव,