तीरगी में चल रहे थे रौशनी बस दिल की थी आँधियों का सामना था,इक ख़ुशी मंज़िल की थी जब के मेरे दिल के टुकड़े चार सू बिखरे रहे, लोग ये कहते रहे ये चाल किस आदिल की थी उर्मिला माधव... 31.3.2014...
यादें---- रात भर मेरे मुहल्ले में अजब सा शोर था, यूँ लगा जैसे किसीकी चूड़ियों पर ज़ोर था, हाथ डाले हाथ में आपस में बातें कर रहे थे, एक घटिया रस्म को अंजाम देते डर रहे थे, कल सवेरे चूड़ि...
जो उसे करना था उसने कर लिया, मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया, फासले दिल में मुक़म्मल हो गए, और दामन इक धुंए से भर लिया, मुतमईँ कोई हो गया उससे बहुत, मैंने हिस्से में महज़ एक डर लिया, सोच...
आँख के नीचे की काली झाइयां, और सारी उम्र की तन्हाईयाँ घेरती हैं अब सवालों से मुझे, आज गुज़रे वक़्त की परछाईयाँ, यूँ भी कहते ही नहीं बनता है कुछ, जब ये मुझमें खोजें हैं रानाईयाँ, ...
फिल बदीह में अभी-अभी कही गई ग़ज़ल--- :: है ये नेमत ज़िन्दगी तो आज़माना चाहिए, जो भी कुछ मिल जाए उसपे,मुस्कुराना चाहिए, :: hai niyamat zidagi to aazmaanaa chahiye, jo bhi kuchh mil jaaye uspe,muskurana chahiye... :: बेखुदी में मुब्तिला होकर नहीं रहना यहाँ, हंसके ...
जो उसे करना था उसने कर लिया, मैंने बस इलज़ाम अपने सर लिया, फासले दिल में मुक़म्मल हो गए, और दामन इक धुंए से भर लिया, मुतमईँ कोई हो गया उससे बहुत, मैंने हिस्से में महज़ एक डर लिया, सोच...
न जाने किस जगह जा कर छुपी है अब वो दीवाली, चरागाँ जब दर-ओ-दीवार होते थे हर इक घर के, मुहब्बत से भरे होते थे रिश्ते .....जब वो पीहर के, ज़रा सी बात पर खुशियां,नज़र आती थीं चेहरे पर, कभी अम्म...
नज़र को नज़र से मिला करके देख, कभी मेरे दिल को हिला करके देख, बनाया मुझे जिसने तबियत से ख़ूबाँ, मेरे कूज़ागर से गिला कर के देख, सबाब-ए-मुहब्बत तवारीख होगी, किसी मर्ग-ए-दिल को जिला कर क...
ज़ख्म-ए-दुनियां का ग़म छुपाने को वक्ती लम्हा उधार करते हैं, जिससे तक़लीफ दिल को होती है,वो ही हम बार-बार करते हैं.... सबको मालूम है ये ग़म क्या है,ऐसे रस्ते का पेच-ओ-ख़म क्या है, दर्द-ए-दि...
चमत्कार को नमस्कार है,कुर्सी वाले बाबूजी राव रंग सब निर्विकार है,कुर्सी वाले बाबूजी रंजू वंजू रीता गीता रोज नाचतीं आँगन में मद्यपान है और बहार है,कुर्सी वाले बाबूजी राग ...
हाय .... HI रुकिए.... एक मुद्दत से रुका ही तो हूँ, देखिये... आँख है तो... देखता ही तो हूँ... सुनिए.... वक़्त ही ऐसा है सुनता ही तो हूँ... उर्मिला माधव... 29.10.2014....
ग़ैर तरही ग़ज़ल---- जो अब तक कर रही हूँ मैं,वही फिर-फिर करुँगी मैं, लगेगी ठेस गर दिल को,ग़ज़ल हाज़िर करुँगी मैं, कोई जज़्बात अपने दिल में रखके रो नहीं सकती, जो ग़र आज़ार हो, अल्फ़ाज़ से ज़ाहिर कर...
इक हुजूमे-ए-दुश्मनां, सामने है रायगां, उफ़ मुहब्बत के लिए !! किस क़दर हैं बदगुमां, जिसने बख़्शी ज़िन्दगी, वो ही देगा सायबां, खुद-ब-खुद करना सभी, कौन किसपे मेहरबां, वक़्त देखा बदतरीन, थ...
लोग तो कितने ऊंचे-ऊंचे खेल वाले हैं, हम हैं गंगू तेली,ख़ालिस तेल वाले हैं, रोज़ दुहाई देते है वो हम हैं तनहा,तनहा, मगर हंसीं लोगों से ख़ासे, मेल वाले हैं, इनका चक्कर रोज़ जबलपुर,दिल्...