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मेरी दौलत बस मेरा ईमान

मेरी दौलत बस मेरा ईमान है, ये मिरे किरदार की पहचान है, बानगी तुमने अभी देखी कहाँ, सामने तो बस फ़क़त उनवान है, रफ़्त में हंसना है बोलो क्या कहूँ, क्यूं ज़माना इस क़दर हैरान है, क़ुव्वते बर्दाश्त मुझको है बहुत, हूँ मुक़ाबिल मैं ऑ मेरी जान है, गर्दिश ए अय्याम ने तोड़ा बहुत, फ़िक़्र क्या जब ज़िंदगी क़ुर्बान है... उर्मिला माधव

घर जाएं तो

चलते-चलते हम कभी मर जाएं तो? इक ख़बर की शक़्ल में घर जाएं तो? ज़िन्दगी का क्या है, थक जानी ही है, इस पे घर वाले भी सब डर जाएं तो? इस की भरपाई भी कर सकते हैं हम, सबके दिल गर प्यार से भर जाएं तो। कुछ भी तब होता रहे जब हम न हों, माना इसकी फ़िक्र भी कर जाएं तो? कुछ समय तो याद सब रहते ही हैं, चोर या फिर मोतबर मर जाएं तो। . उर्मिला माधव