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Showing posts from August, 2022

खड़े रहना

दोस्त  के साथ तो खड़े रहना, पर गलत शख्स के परे रहना, बात अच्छी है कुछ यकीन रखो, धोखे बाज़ों से बस डरे रहना, जो भी जैसा है उसको रहने दो, सिर्फ नीयत से तुम,खरे रहना,  झूठ में कुछ भी दम नहीं होता, अपनी सच्चाई पर अड़े रहना, कुछ तो ऐसा भी काम करते हैं  पीछे लोगों के बस पड़े रहना..... उर्मिला माधव... 31.8.2014...

नींद से जगाए गए

रात हम नींद से जगाये गए, बा-जबर होश में भी लाये गए, हम जहाँ थे वहां पे थे ही नहीं, ख्वाब में खोये से बताये गए, अपनी दुनियां में लौट आये हम, उनकी यादों से जब हटाये गए, जो थे असबाब अपने हाथों में, सब के सब ही ज़मीं पे पाए गए, एक चुन्नी थी,और मोबाइल था, एक-एक करके सब उठाये गए  सबने पूछा कहाँ हो मोहतरमा, हंसके बिस्तर पे हम सुलाए गए.... #उर्मिलामाधव... 31.8.2015

कासा नहीं रखती

ज़रूरतमंद हूँ लेकिन कोई कासा नही रखती, इरादा जो भी रखती हूं कभी आधा नहीं रखती, मेरी आवाज़ का हिस्सा फ़लक तक भी पहुंचता है, जो कहती हूँ बुलंदी से,ज़ुबाँ सादा नहीं रखती, मेरे खूँ में तो नाफ़रमानियाँ, शामिल नहीं हरगिज़, मगर इल्ज़ाम है सर पर, के ये वादा नहीं रखती, अभी कुछ ज़ख़्म रिसते हैं,अभी कुछ वक्त बाक़ी है, ये ग़म बहने का ज़रिया हैं तो मैं फ़ाहा नहीं रखती, मुझे भी क़ब्र तक ले जाएगी बादे सबा इक दिन इसी डर से मैं अपनी रूह पे साया नहीं रखती उर्मिला माधव, 30.8.2017

दुनियां का रंग देखा

दुनिया का रंग देखा और मुस्कुरा दिए हम, ख़ुद को मलंग देखा और मुस्कुरा दिए हम। कुछ दूर तक तो हमने, पीछा किया जहां का, दिल सबका तंग देखा, और मुस्कुरा दिए हम। उर्मिला माधव

करते ही नहीं

अब कोई कोशिश तो करते ही नहीं, जब किसी भी ग़म से मरते ही नहीं..