Dushmani ka daayra kuchh kam nahin, Farq bas itna hai , mujhko ghm nahin, **** दुश्मनी का दायरा कुछ कम नहीं, फ़र्क़ बस इतना है, मुझको ग़म नही, Zarq dil par chahe jitna ho magar, Ispe bhii gardan men koi kham nahin, **** ज़र्क़ दिल पर चाहे जितना हो मगर, इसपे भी ....गर्दन में कोई ख़म नहीं... Urmila Madhav .. 12.2.2017
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करने आए थे हमें बदनाम सब, कर नहीं पाए मगर ये काम सब, जो ये कहते थे खुदी को कर बुलंद, वो ही बैठे हैं जिगर को थाम सब, बेचने को आए हम भी ज़िन्दगी, कर गए साबित हमें बेदाम सब, अब सबीलों की दरारें बढ़ गयीं , घर भी करने आगये नीलाम सब, मेरी किस्मत का तमाशा क्या रहा, देखने को आ गए.....अंजाम सब.... उर्मिला माधव... 14.4.2014..