इम्तिहाँ है ज़िन्दगी तो जो हुआ अच्छा हुआ, ये ही तो बेचारगी है,वक़्त कब किसका हुआ? टूटना दिल का हुआ मंज़ूर जब हर हाल में, रंज क्या करना भले झूठा हुआ सच्चा हुआ, # उर्मिलामाधव ... 26.9.2015
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न तू देख इतने गुरूर से,के मैं लौट जाऊँगी दूर से'' ये पयाम तेरी नज़र को है,इसे जोड़ दिल के सुरूर से.. मेरे ग़म से तू भी है पुर असर,मेरा दावा है मैं ग़लत नहीं, न यूँ ऐतकाफ़ से काम ले,आ बचाले खुद को कुसूर से... मेरे दिल का तू ही क़रार है,तुझे सोचती हूँ मैं रात दिन, मेरी रात है तेरी जुस्तजू ........है सहर भी तेरे ही नूर से, मेरे दिल का कौन हफ़ीज़ है,तेरी दूरियां ही ज़वाल हैं, ये बता के किससे गिला करें ,जी मिले हैं दर्द गुरूर से, ये बयान जो देना पड़ा मुझे तेरी जुस्तजू के सवाल पर कभी ज़िन्दगी में विसाल हो ....तो कहूँगी पूरे शऊर से # उर्मिलामाधव
उम्र भर को जुड़ गए हैं,आपसे जज़्बात मेरे.
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उम्र भर को जुड़ गए हैं,आपसे जज़्बात मेरे. साथ बस देते नहीं हैं,आजकल हालात मेरे, ख़ुश्क आँखों का वो मंज़र देख कर ऐसा हुआ अश्क़ लानत दे गए हैं क्या कहूँ कल रात मेरे, सोचती हूँ आख़िरश बाहर निकलकर क्या करूँ दम-ब-दम जलती ज़मीं ऑ सर पै ये बरसात मेरे, दोनों हाथों से उठा कर फेंकती रहती हूँ बाहर, हो गई घर में ग़मों की रात-दिन इफरात मेरे, भूल सी जाती हूँ मैं सब,मेरी दुनियां क्या हुई ? वहशतें सी कह रही हैं कान में कुछ बात मेरे... #उर्मिलामाधव, 8.9.2015..